जीवन का उद्देश्य

इस संसार में रहते हुए मनुष्य के मन में एक प्रश्न यदा -कदा कौंध जाता है कि मेरे जीवन का लक्ष्य क्या है ? ऐसा प्रश्न जीवन की किसी भी अवस्था में सोच के रूप में उभर सकता है और भिन्न -भिन्न सोच के कारण प्रत्येक का उद्देश्य भी भिन्न हो सकता है ,यह निश्चित है ।क्या ऐसा भी हो सकता है कि मानव का एक सामान्य उद्देश्य हो और जिससे किसी को भी कोई आपत्ति या गुरेज़ न हो ।

इस सम्बन्ध में यदि प्रत्येक मनुष्य यह सोचे कि इस संसार में एक प्राणी के रूप में मेरा क्या योगदान हो सकता है ?अगर हम अपनी ओर से किसी एक को भी जीवन जीने में सहायता कर पाएँ सहयोग देकर किसी को बेहतर जीने की राह दे पाएँ तो मेरी दृष्टि में यह एक बड़ा योगदान होगा ।इसके लिए बैठ कर योजना बनाने की आवश्यकता नहीं है अपितु जीवन राह पर चलते हुए परिस्थितिवश जब भी अवसर मिले अपना योगदान दे सकते हैं ।जब ऐसी बात होती है तो कुछ यह कहने लग जाते हैं कि हम तो इतने सम्पन्न नहीं हैं ।क्योंकि लोग यही सोचते हैं कि केवल आर्थिक रूप से ही योगदान कर सकते हैं ,नहीं ऐसा बिलकुल भी नहीं है ।आप अपनी ताक़त को पहचानिये ,प्रत्येक मनुष्य में ताक़त भी होती है और दुर्बलता भी ।जब हम अपनी ताक़त के विषय में सोचते हैं तो हम सफलता की ओर बढ़ते हैं और दुर्बलताओं पर विचार करने पर असफलताओं की ओर गिरते हैं ।इसके साथ -साथ  कोई न कोई योग्यता प्रत्येक मनुष्य में होती है ,वह उसे बाँट कर किसी का जीवन सँवार सकता है  ,जैसे कोई किसी की धन से सहायता तो नहीं कर सकता परन्तु उसके पास बौद्धिक क्षमता है वह इससे दूसरों की सहायता कर सकता है ।

बात केवल इतनी ही है कि जब हम जिस दिशा में कुछ करने की सोचने लगते हैं ,रास्ते अपने आप खुलने लगते हैं ,लक्ष्य दीखने लगता है दृश्य स्पष्ट होने लगता है ।इस तरह इस राह में रखा गया एक क़दम तुम्हें तुम्हारे पीछे न जाने कितने और क़दमों को उठाने की प्रेरणा दे सकता है ।शुरुआत इसी तरह से होती है ।हमें इस संसार ने बहुत कुछ दिया है ,यदि एक छोटा सा योगदान हमारी ओर से भी हो जाए तो जीवन सफल हो जाएगा ।

 

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