ओ भारत के भारतीयों

ओ भारत  के भारतीयों !

भारत में रहने वालों

जागो और निज को देखो भालो ,

क्यों अपने संस्कार छोड़ के

बिन साँस लिए दौड़ के ,

उस  देश के पीछे भाग रहे

जो संस्कारहीन प्रतिमाओं से

अपने अंगों में भर आग रहे ।

तुम्हारी हर सुबह है एक पर्व 

तुम करो इस बात पर गर्व ,

दिनकर उदय होता है पूर्व में

और

सदा डूब जाता  है पश्चिम में ,

गुम हो जाता है पश्चिम सिर्फ़ 

पश्चिम में ।

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